चीनी रुख के विरूद्ध हिंदुस्तान को मिली बड़ी कूटनीतिक सफलता…

चीनी रुख के विरूद्ध हिंदुस्तान को मिली बड़ी कूटनीतिक सफलता…

चाइना के साथ दो महीने से जारी सीमा टकराव में को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ा समर्थन मिला है. जापान ने चाइना पर कटाक्ष करते हुए बोला है कि बल इस्तेमाल से माहौल को गंभीर करने की प्रयास नहीं होनी चाहिए. हिंदुस्तान में जापान के राजदूत केंजी हीरामात्सु ने यह बयान तब दिया है, जब वाशिंगटन में अमेरिका व जापान के विदेश मंत्रियों ने हिंदुस्तान से सैन्य योगदान बढ़ाने की पेशकश की है. हीरामात्सु के वक्तव्य से चिढ़े चाइना ने शुक्रवार शाम को बोला कि जापान को वस्तुस्थिति की पूरी जानकारी लेने के बाद ही बयान देना चाहिए.

जापानी राजदूत के मुताबिक, दो महीने से चल रहा डोकलाम टकराव पूरे एरिया के स्थायित्व के लिए खतरा है. उन्होंने हिंदुस्तान की किरदार का सीधे तौर पर समर्थन किया है. हिंदुस्तान भूटान व चाइनाके बीच जारी टकराव में इसलिए पड़ा है कि उसका भूटान के साथ पहले से समझौता है. जापान ने वार्ता से मामला सुलझाने के हिंदुस्तान के प्रयासों को भी सराहा है. हिंदुस्तान गवर्नमेंट ने आधिकारिक तौर पर जापान से मिले इस समर्थन पर कुछ नहीं बोला है. लेकिन, विदेश मंत्रालय के सूत्र बताते हैं कि जापान का यह समर्थन बहुत जरूरी है.
जब डोकलाम टकराव प्रारम्भ हुआ था, तब हिंदुस्तान ने जापान व अमेरिका के साथ मिल कर अब तक का सबसे बड़ा सैन्य एक्सरसाइज किया था. इसको लेकर चाइना की भृकुटियां भी तनी थीं.चाइना पहले से ही भारत, जापान व अमेरिका के बीच बढ़ रहे सैन्य योगदान को शक की नजर से देखता रहा है.
बहरहाल, जानकारों की राय में जापान का समर्थन हिंदुस्तान की संयमपूर्ण कूटनीति की जीत है. कई जानकार मान रहे हैं कि जापान ने यह बयान देकर चाइना को इशारा दिया है कि वह मामले को बेवजह तनावपूर्ण बनाने की प्रयास न करे व हिंदुस्तान के साथ वार्ता से सुलझाए.
विदेश मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, डोकलाम मुद्दे पर हिंदुस्तान ने हाल के दिनों में दो दर्जन से ज्यादा प्रमुख राष्ट्रों के राजदूतों को अपने रुख से अवगत कराया है. इसके अतिरिक्त दूसरे राष्ट्रों को वहां स्थित इंडियन राजदूत दशा के बारे में जानकारी दे रहे हैं. सूत्रों के मुताबिक, आस्ट्रेलिया, दक्षिण कोरिया, वियतनाम समेत कई यूरोपीय राष्ट्रों ने हिंदुस्तान के रुख का समर्थन किया है.
इस बीच, हिंदुस्तान गवर्नमेंट ने चाइना से लगे इलाके में दशा का जायजा लेने के लिए वरिष्ठ अधिकारियों की टीम भेजने का निर्णय किया है. सूत्रों ने बताया कि ऑफिसर सैनिकों व अर्धसैनिक बलों को मिलने वाली सुविधाओं की भी समीक्षा करेंगे.
अगले महीने आएंगे जापानी पीएम
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व जापान के पीएम शिंजो एबी की अगुआई में दोनों राष्ट्रों के रिश्तों में बहुत ज्यादा गहराई आ रही है. अगले महीने एबी हिंदुस्तान की यात्रा पर आने वाले हैं. उनकी यात्रा के दौरान आपसी योगदान को नयी दिशा देने के लिए आयोजित होने वाली सालाना मीटिंग भी होगी.माना जा रहा है कि इस यात्रा के दौरान हिंदुस्तान और जापान एक दूसरे को रणनीतिक साझेदार घोषित करेंगे.
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